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Kushan dynasty कुषाण वंश तथा शक वंश

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                शक एवं कुषाणो का इतिहास                           भारतीय इतिहास में, शक तथा कुषाण साम्राज्य का अपना अलग महत्व है। इन दोनों साम्राज्यो के द्वारा भारतीय इतिहास को समृद्ध बनाने में बहुत सा योगदान दिया गया है जिस का विस्तृत विवरण इस ब्लाक के अंतर्गत जानकारी के माध्यम से दिया जा रहा है। इतिहास के उपलब्ध विभिन्न प्रमाणों से यह पता चलता है कि शक कई झुण्डो में भारत में आए और प्रथम शताब्दी ईसा पूर्व के अंतर तक वे गंधार, पंजाब , मथुरा, काठियावाड़ और दक्षिण में महाराष्ट्र तक के भूभाग में फैल गए थे।                 इतिहास के स्रोतों से पता चलता है कि सख्त शासकों ने"क्षत्रप और महाक्षत्रप की उपाधियों को धारण किया और प्रारंभ में वह पार्थियन के अधीन तथा बाद में कुषाण ओ की सत्ता को स्वीकार किया।                 शक साम्राज्य विशेष तथ्य   शको नहीं भारी संख्या में चांदी...

Shung vansh सातवाहन वंश, वाकाटक वंश विशेष

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                            शुंग वंश     शुंग वंश से संबंधित अति महत्वपूर्ण तथ्य  -     1-शुंग वंश की स्थापना पुष्यमित्र शुंग ने 185 ई.पू. में अंतिम मौर्य शासक बृहद्रथ की हत्या करके की थी। 2-शुंग शासकों ने विदिशा को अपनी राजधानी बनाया। पाटलिपुत्र अयोध्या एवं जालंधर इस समय महत्वपूर्ण नगर थे। 3-पुष्यमित्र शुंग का संघर्ष यवनों से दो बार-इसका उल्लेख उल्लेख गार्गी संहिता करता है। प्रथम युद्ध में यवन सेना का नेतृत्व Demetriyas ने किया था। द्वितीय यवन शुंग संघर्ष में संभवत पुष्यमित्र शुंग के पौत्र वसुमित्र ने शुंग सेना का प्रतिनिधित्व किया। यह युद्ध सिंधु नदी के तट पर लड़ा गया जिसमें वसुमित्र ने यवन सेनापति मेंनाण्डर को हराया। इस दूसरे युद्ध का उल्लेख।  मालविकाग्निमित्रम् मैं मिलता है। 4-शुंगो का विदर्भ के साथ भी संघर्ष हुआ जिसमें पुष्यमित्र के पुत्र अग्नि मित्र और विदर्भ के गवर्नर यज्ञ सेन के मध्य जिसमें यज्ञ सेन पराजित हुआ। इस युद्ध में शुंग सेनापति वीरसेन था। 5...

Mauryan Administration

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                       Mauryan Administration मौर्य साम्राज्य                          चंद्रगुप्त मौर्य   मौर्य राजवंश की स्थापना चंद्रगुप्त मौर्य ने की थी। चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने गुरु चाणक्य (विष्णु गुप्त) की सहायता से नंद वंश के अंतिम शासक धनानंद को हराकर 323 ईसा पूर्व में मौर्य वंश की स्थापना की।   चंद्रगुप्त मौर्य के कुल के संबंध में प्रचलित मत                    चंद्रगुप्त मौर्य के संबंध में अनेक विद्वानों ने अलग अलग मत दिए हैं, कुछ विद्वान चंद्रगुप्त मौर्य को साधारण कुल का तथा कुछ ब्राह्मण कुल का मानते हैं। ब्राह्मण परंपरा के अनुसार चंद्रगुप्त की माता शूद्र जाति की मुरा नामक स्त्री थी जो नंदू के रनवास में रहती थी।ऐसी अनेक मान्यताएं चंद्रगुप्त के कुल से संबंधित है जिन्हें हम विस्तार से स्पष्ट कर रहे हैं।  ब्राह्मण साहित्य   सबसे महत्वपूर्ण मात्रा मण साहित्य क...

Indian campaing of Alexander the Great(भारत पर सिकंदर का आक्रमण)

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          भारत पर विदेशियों के आक्रमण।                  भारतीय इतिहास के प्रत्येक काल में चाहे वह प्राचीन काल हो मध्यकल हो  या फिर आधुनिक काल हो। भारत की धरा पर विदेशियों का आगमन अलग-अलग कारणों से अलग-अलग कालो में हुआ है, प्रारंभ में यह आगमन व्यापारिक तौर पर तथा बाद में यही एक आक्रमणकारी के रूप में सामने आए हैं आज के इस लेख में हम प्राचीन काल में भारत पर जिन आक्रमणकारियों ने आक्रमण कर भारत की संपदा को नष्ट करना चाहा उन्हें आक्रमणकारियों के बारे में विस्तृत रूप से चर्चा करेंगे।  भारत पर ईरानी आक्रमण   भारत प्रारंभ से ही छोटे-छोटे रजवाड़ों में बांटा था पूर्वोत्तर भारत के छोटे-छोटे रजवाड़े धीरे-धीरे मगध साम्राज्य में विलय हो गए। परंतु पश्चिमोत्तर भारत की स्थिति इस दौरान अलग थी। कंबोज, गंधार तथा मद्रास के राजा आपस में लड़ते रहते थे। क्षेत्र में मगध जैसा कोई शक्तिशाली साम्राज्य नहीं था जो इन आपस में लड़ने वाले समुदायों को एक संगठित साम्राज्य के रूप में परिणित कर सकें। एक विशेष बात यह थी कि इ...

India's famous historical palace (भारत के प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल)

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          भारतीय इतिहास के प्रसिद्ध स्थल             भारतीय इतिहास के ऐसे प्राचीन स्थल हुए, जिन्हें, इतिहास काल में बहुत अधिक प्रसिद्धि प्राप्त हुई कुछ नगर वर्तमान में अपने बदले स्वरूप में नजर आ रहे हैं, तथा कुछ नगर इतिहास के गर्त में समा कर ओझल हो चुके हैं, आज हम अपने इस लेख के माध्यम से प्राचीन तथा प्रसिद्ध उन नगरों की चर्चा करेंगे जिनका नाम इतिहास में बड़े गौरव पूर्ण ढंग से लिया जाता है।  1-इंद्रप्रस्थ   प्राचीन नगरों की श्रृखला में इंद्रप्रस्थ का  उज्जयिनि नाम अग्रणी रूप से लिया जाता है, यह भारत का बहुत प्राचीन नगर था। यह यमुना के तट से आधुनिक दिल्ली तक लगभग 4 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। महाभारत में इस नगर को वृहस्थल भी कहा गया है। यहां पांडवों की राजधानी थी तथा इन्होंने ही इंद्रप्रस्थ की स्थापना की थी। इंद्रप्रस्थ मनोहर चित्रशाला, रमणीक वाटिका ओ तथा सुंदर सरोवर के लिए प्रसिद्ध था, वर्तमान में यह आधुनिक दिल्ली के नाम से जाना जाता है।  उज्जयिनि -  पुरातन सभ्यता में विद्या तथा सं...

Jain dharm जैन धर्म

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                      जैन धर्म Jain dharm     जैन धर्म का अवतरण -  छठी शताब्दी ईसा पूर्व का भारतीय इतिहास में महत्व इसलिए बढ़ जाता है, क्योंकि छठी शताब्दी में वैदिक धर्म के विरुद्ध जो आंदोलन छेड़े गए, उसके फल स्वरूप भारत में जो नई धार्मिक क्रांति आई उनमें से जैन धर्म अपना अति महत्वपूर्ण स्थान रखता है।           वर्धमान महावीर का जन्म 540 ईसा पूर्व में वैशाली के पास किसी गांव में हुआ। वैशाली की पहचान उत्तर बिहार में इसी नाम से नव स्थापित जिले के बसाढ से की गई है।उनके पिता सिद्धार्थ ए क्षत्रिय कुल के प्रधान थे। उनकी माता का नाम त्रिशाला था जो बिंबिसार के ससुर लिच्छवी नरेश चेतक की बहन थी।इस प्रकार महावीर के परिवार का संबंध मगध के राजपरिवार से था उच्च फूलों से संबंध के कारण अपने धर्म प्रचार के क्रम में उन्हें राजा और राज सचिवों के साथ संपर्क करना आसान हुआ।               महावीर स्वामी से जुड़ी मुख्य बातें   सिद्धार्थ - महावीर स्वामी के ...

Baudh dharm बौद्ध धर्म

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                          बौद्ध धर्म                                            इतिहास में छठवीं शताब्दी धर्म सुधार आंदोलन के लिए प्रसिद्ध है, वास्तव में यह का हाल महान दार्शनिकों के विचारों का काल था। इसी काल में भारत में दो नए प्रबल धर्म सामने आए जिनमें प्रथम बौद्ध धर्म तथा दूसरा जैन धर्म, इन दोनों धर्मों के सामने आने का कारण वैदिक सनातन धर्म में अनेक खामियों के कारण बौद्ध धर्म और जन धर्म के रूप में सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलन का भारत की धरा पर आगाज हुआ।                                                                 गौतम बुद्ध का जीवन।   गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व में नेपाल की तराई में स्थित कपिलवस्तु के समीप लुंबिनी ग्...